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बारिश की बूँदों का अब है सहारा

✍️ लेखन: अनुराग यदुवंशी

बारिश की बूँदों का अब है सहारा

 

इस जग में न कोई हमारा तुम्हारा

बारिश की बूंदें बनेंगी जो नदियां

नदियों में उतरेगी मेरी नैया

नैया खिलायेगा मेरा खिवैया

खिवैया चीरेगा जल की धारा

तभी तो मिलेगा हमको किनारा

बारिश की...

इस जग...

 

ज़माने की उल्फत जो हम सह गए

कीचड़ में कई फिर कमल खिल गए

लिखते-लिखते कलम ये न है थकी-

शाम तक बस हम लिखते रह गए

कैसे बताऊँ, हाँ किसको बताऊं

ये हाल हमारा

बारिश की...

इस जग...

 

अपनी जवानी की एक कहानी

एक लड़की थी जो थी बहुत सयानी

मोहब्बत का यारों कुछ ऐसा असर था,

जैसे बिन बरखा के पानी

मोहब्बत मिली न मिला ऐसा गम है

हम ही न रहे जैसे हम हैं

चाहा था उसको हाँ माँगा था उसको

जब भी टूटा कोई तारा

बारिश की...

इस जग...

 

~ अनुराग यदुवंशी

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