1. पारंपरिक प्रकाशन (Traditional Publishing)
इस प्रकार में प्रकाशक लेखक की पांडुलिपि का चयन करता है और पुस्तक के संपादन, डिजाइन, छपाई तथा वितरण की पूरी जिम्मेदारी लेता है। लेखक को बिक्री के आधार पर रॉयल्टी मिलती है।
2. स्वयं प्रकाशन (Self Publishing)
इसमें लेखक अपनी पुस्तक स्वयं प्रकाशित करता है। वह संपादन, डिजाइन, छपाई और वितरण की व्यवस्था खुद करता है या किसी सेवा प्रदाता की मदद लेता है।
3. सह-प्रकाशन (Co-Publishing)
इस मॉडल में लेखक और प्रकाशक दोनों मिलकर पुस्तक के प्रकाशन में भागीदारी करते हैं। कभी-कभी लेखक कुछ आर्थिक सहयोग देता है और प्रकाशक बाकी काम संभालता है।
4. डिजिटल प्रकाशन (Digital / E-book Publishing)
इस प्रकार में पुस्तक को डिजिटल रूप में प्रकाशित किया जाता है, जैसे ई-बुक, जिसे मोबाइल, टैबलेट या कंप्यूटर पर पढ़ा जा सकता है।
5. प्रिंट-ऑन-डिमांड प्रकाशन (Print on Demand)
इसमें पुस्तक को पहले से अधिक मात्रा में नहीं छापा जाता। जब भी ऑर्डर मिलता है, उसी समय पुस्तक की प्रतियाँ छापी जाती हैं।
6. अकादमिक या शोध प्रकाशन (Academic or Research Publication)
इस प्रकार में शोध-ग्रंथ, थीसिस, पाठ्यपुस्तकें और शैक्षणिक विषयों से संबंधित पुस्तकें प्रकाशित की जाती हैं।
7. संस्थागत प्रकाशन (Institutional Publication)
किसी संस्था, संगठन, विश्वविद्यालय या ट्रस्ट द्वारा अपने उद्देश्यों और कार्यों से संबंधित पुस्तकों का प्रकाशन।
8. स्वतंत्र या लघु प्रकाशन (Independent / Small Press Publishing)
छोटे और स्वतंत्र प्रकाशन घरानों द्वारा सीमित संसाधनों के साथ साहित्यिक या वैकल्पिक पुस्तकों का प्रकाशन।
9. संकलन प्रकाशन (Anthology Publishing)
कई लेखकों की रचनाओं को एक साथ जोड़कर संकलन के रूप में प्रकाशित करना, जैसे कविता संकलन या कहानी संकलन।
10. पुनर्प्रकाशन (Reprint / Revised Edition)
पहले से प्रकाशित पुस्तक को नए संस्करण या संशोधित रूप में फिर से प्रकाशित करना।