1. मौलिकता (Originality) -
प्रकाशन के लिए भेजी गई रचना पूर्णतः मौलिक होनी चाहिए। वह किसी अन्य पुस्तक, पत्रिका, वेबसाइट या डिजिटल मंच से कॉपी या अनुवादित नहीं होनी चाहिए। यदि रचना पहले कहीं प्रकाशित हो चुकी है तो इसकी जानकारी अवश्य दें।
2. विषय और विधा -
कोहबर प्रकाशन मुख्य रूप से साहित्य, कला और संस्कृति से संबंधित पुस्तकों को प्रकाशित करता है। इसमें कविता, कहानी, उपन्यास, निबंध, आलोचना, संस्मरण, यात्रा-वृत्तांत, कला, लोक-संस्कृति तथा सामाजिक विषयों पर आधारित रचनाएँ शामिल हैं।
3. पांडुलिपि का प्रारूप -
पांडुलिपि यूनिकोड हिन्दी फ़ॉन्ट (जैसे Noto Sans, Mukta, Kokila आदि) में टाइप की हुई होनी चाहिए। फाइल Word (.doc/.docx) प्रारूप में भेजना उचित है, ताकि संपादन और समीक्षा में सुविधा हो।
4. भाषा और शैली -
रचना की भाषा स्पष्ट, सुसंगत और शुद्ध होनी चाहिए। अनावश्यक कठिन शब्दों या अत्यधिक जटिल शैली से बचना चाहिए, ताकि पाठकों के लिए पढ़ना सहज रहे।
5. पांडुलिपि की पूर्णता -
प्रकाशन के लिए भेजी गई पांडुलिपि यथासंभव पूर्ण और व्यवस्थित होनी चाहिए। अधूरी या असंगठित पांडुलिपि पर विचार करना कठिन होता है।
6. लेखक का परिचय -
पांडुलिपि के साथ लेखक को अपना संक्षिप्त परिचय देना होगा, जिसमें नाम, पता, ईमेल/फोन नंबर, शैक्षिक या साहित्यिक पृष्ठभूमि तथा पूर्व प्रकाशित कृतियों का उल्लेख शामिल हो सकता है।
7. संपर्क विवरण -
लेखक अपने सक्रिय ईमेल और फोन नंबर अवश्य दें, ताकि पांडुलिपि से संबंधित किसी भी सूचना या संवाद के लिए संपर्क किया जा सके।
8. चयन प्रक्रिया -
प्राप्त पांडुलिपियों की समीक्षा कोहबर प्रकाशन की संपादकीय टीम द्वारा की जाती है। रचना की गुणवत्ता, विषय की प्रासंगिकता और प्रकाशन योजना को ध्यान में रखकर चयन किया जाता है।
9. संपादन का अधिकार -
पुस्तक के प्रकाशन से पहले भाषा, वर्तनी, शैली और संरचना को बेहतर बनाने के लिए संपादकीय संपादन किया जा सकता है। यह संपादन लेखक की सहमति से किया जाता है।
10. प्रकाशन अनुबंध -
यदि पांडुलिपि प्रकाशन के लिए स्वीकृत होती है, तो लेखक और प्रकाशन के बीच एक औपचारिक अनुबंध या सहमति पत्र किया जाएगा, जिसमें सभी शर्तें स्पष्ट होंगी।
11. कॉपीराइट नीति -
सामान्यतः पुस्तक का कॉपीराइट लेखक के पास रहता है, जबकि पुस्तक के प्रकाशन, वितरण और प्रचार के अधिकार अनुबंध के अनुसार तय किए जाते हैं।
12. प्रकाशन समय -
पांडुलिपि स्वीकृत होने के बाद पुस्तक के संपादन, डिजाइन, प्रूफ और छपाई की प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है। इसलिए प्रकाशन की समय-सीमा प्रकाशन की योजना के अनुसार तय की जाती है।
13. नैतिक जिम्मेदारी -
रचना में दिए गए विचार, तथ्य और संदर्भ की जिम्मेदारी लेखक की होगी। यदि किसी प्रकार के कॉपीराइट विवाद या तथ्यात्मक त्रुटि होती है तो उसकी जवाबदेही लेखक की होगी।
14. अंतिम निर्णय -
पांडुलिपि के चयन, संपादन और प्रकाशन से संबंधित सभी मामलों में अंतिम निर्णय कोहबर प्रकाशन की संपादकीय टीम का होगा।