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ख़ुदा हम को ऐसी ख़ुदाई न दे

✍️ लेखन: बशीर बद्र

ख़ुदा हम को ऐसी ख़ुदाई न दे

कि अपने सिवा कुछ दिखाई न दे

 

ख़ता-वार समझेगी दुनिया तुझे

अब इतनी ज़ियादा सफ़ाई न दे

 

हँसो आज इतना कि इस शोर में

सदा सिसकियों की सुनाई न दे

 

ग़ुलामी को बरकत समझने लगें

असीरों को ऐसी रिहाई न दे

 

ख़ुदा ऐसे एहसास का नाम है

रहे सामने और दिखाई न दे


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