कृपया प्रतीक्षा करें...
✍️ लेखन: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
गान्धीवादी आये,
कांग्रेसमैन टेढ़े के;
देर तक, गान्धीवाद क्या है, समझाते रहे।
देश की भक्ति से,
निर्विरोध शक्ति से,
राज अपना होगा;
ज़मींदार, साहूकार अपने कहलायेंगे
शासन की सत्ता हिल जायगी;
हिन्दू और मुसलमान
वैरभाव भूलकर जल्द गले लगेंगे,
जितने उत्पात हैं,
नौकरों के लिए हुए;
जब तक इनका कोई
एक आदमी भी होगा,
चूल नहीं बैठने की।
इस प्रकार जब बघार चलती थी,
ज़मींदार का गोड़इत
दोनाली लिये हुए
एक खेत फ़ासले से
गोली चलाने लगा।
भीड़ भागने लगी।
कान्स्टेबल खड़ा हुआ ललकारता रहा।
झींगुर ने कहा,
"चूँकि हम किसान-सभा के,
भाईजी के मददगार
ज़मींदार ने गोली चलवायी
पुलिस के हुक्म की तामीली को।
ऐसा यह पेच है।"
संदर्भ - नये पत्ते, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
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