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ओवरथिंकिंग कोई बीमारी नहीं, एक आदत है जिसे बदला जा सकता है! क्या आप भी एक छोटे से मैसेज का जवाब न मिलने पर घंटों ख़ुद से ही काल्पनिक जंग लड़ते रहते हैं? किसी के रूखे लहजे से बात करने पर आपकी रात भर की नींद उड़ जाती है? हर छोटी बात को पहाड़ बनाना, पुरानी ग़लतियों पर ख़ुद को कोसना और भविष्य के डर में जीना-अगर यह आपकी रोज़मर्रा की कहानी है, तो यह किताब ख़ास आपके लिए है। 'हाउ टू कम फ्रॉम ओवरथिंकिंग' आपके अशांत मन को शांत करने की एक प्रैक्टिकल और असरदार गाइड है। यह किताब आपको बताती है कि: आप ओवरथिंकर पैदा नहीं हुए थे यह समाज, डर और परफेक्ट दिखने के दबाव का नतीजा है। दिमाग की गैप-फिलिंग थ्योरी - क्यों आपका दिमाग़ आधी अधूरी बातों में डर और नकारात्मक कहानियों के रंग भर देता है। रियलिटी बनाम स्टोरी कैसे विचार और हकीकत के बीच का फ़र्क समझकर आप तुरंत राहत पा सकते हैं। ऑटो-पायलट और इमोशनल हाइजैक से मुक्ति अपने अतीत के पैटर्न को तोड़कर दिमाग के अनइंस्टॉल बटन को दबाने का आसान तरीका।
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| Writer/Author | Samay Patrika |
| ISBN | 978-8168802933 |
| Edition | First |
| Publisher | Khyaati Prakashan |
| Binding Type | Paperback |
| Language | Hindi |
| Weight | 250 g |
| Dimensions | 22 x 14 x 3 |
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