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Pachapan Khambhe Lal Diware (पचपन खंभे लाल दीवारें) - Usha Priyamvada

Pachapan Khambhe Lal Diware (पचपन खंभे लाल दीवारें) - Usha Priyamvada

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M.R.P.: ₹250
Description:

उषा प्रियम्वदा की गणना हिन्दी के उन कथाकारों में होती है जिन्होंने आधुनिक जीवन की ऊब, छटपटाहट, संत्रास और अकेलेपन की स्थिति को अनुभूति के स्तर पर पहचाना और व्यक्त किया है। यही कारण है कि उनकी रचनाओं में एक ओर आधुनिकता का प्रबल स्वर मिलता है तो दूसरी ओर उनमें चित्रित प्रसंगों तथा संवेदनाओं के साथ हर वर्ग का पाठक तादात्म्य का अनुभव करता है; यहाँ तक कि पुराने संस्कारवाले पाठकों को भी किसी तरह के अटपटेपन का एहसास नहीं होता। छात्रावास के पचपन खम्भे और लाल दीवारें उन परिस्थितियों के प्रतीक हैं जिनमें रहकर सुषमा को ऊब तथा घुटन का तीखा एहसास होता है, लेकिन फिर भी वह उनसे मुक्त नहीं हो पाती, शायद होना नहीं चाहती, उन परिस्थितियों के बीच जीना ही उसकी नियति है। आधुनिक जीवन की यह एक बड़ी विडम्बना है कि जो हम नहीं चाहते, वही करने को विवश हैं। लेखिका ने इस स्थिति को बड़े ही कलात्मक ढंग से प्रस्तुत उपन्यास में चित्रित किया है।

Product Information:
Writer/Author: Usha Priyamvada
ISBN: 9788126716630
Edition: 2026
Publisher: Rajkamal Prakashan
Binding: Paperback
Language: Hindi
Product Code: RP0040
Weight: 200 g
Dimensions: 22 x 14 x 2
Availability: In Stock
Quantity:

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Writer/Author Usha Priyamvada
ISBN 9788126716630
Edition 2026
Publisher Rajkamal Prakashan
Binding Type Paperback
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