कृपया प्रतीक्षा करें...
✍️ लेखन: डॉ. रामसेवक 'विकल'
लागल चुनरिया में दाग हो
देखि चिहुंके सँवरिया
का करे अइलू आ का करि भइलू
रहि के सजन सँग ओही के भुलवलू
चमकल ना तोहरो सुहाग हो
देखि चिहुंके सँवरिया
चढ़ली जवानी में खेली कुदि खईलू
सोना के देहिया के माटी बनवलू
हो गइल करम अभाग हो
देखि चिहुंके सँवरिया
सखिया सलेहरिन में ढ़ेर दिन बीतल
मन के कँवल पर भँवरा न रीझल
सधिया के भइली ना माँग हो
देखि चिहुंके सँवरिया
चल ओही देश जहाँ कबों ना अन्हार होई
आत्मा जुड़ा जाई जिनगी साकार होई
उहवें तू होइबू बेदाग हो
देखि चिहुंके सँवरिया
Start typing and press Enter to search