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डॉ. रामसेवक 'विकल' का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिला के इसारी सलेमपुर गाँव में 01 जुलाई सन् 1939 ई. में हुआ था। स्कूली शिक्षा गाँव से प्राप्त करने के बाद सन् 1958 ई. में सतीश चंद्र डिग्री कॉलेज बलिया से उन्होंने बी.ए. की उपाधि प्राप्त की। बी.ए. करने के बाद वे वकालत में दाखिला लिए परंतु परिवार की आर...
डॉ. रामसेवक 'विकल' का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिला के इसारी सलेमपुर गाँव में 01 जुलाई सन् 1939 ई. में हुआ था। स्कूली शिक्षा गाँव से प्राप्त करने के बाद सन् 1958 ई. में सतीश चंद्र डिग्री कॉलेज बलिया से उन्होंने बी.ए. की उपाधि प्राप्त की। बी.ए. करने के बाद वे वकालत में दाखिला लिए परंतु परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वकालत की पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। तत्पश्चात् वे लौह नगरी जमशेदपुर में अपने बड़े भाई श्री रामकिंकर शर्मा के पास चले गए। कुछ समय पश्चात् उन्होंने गिरि भारती स्कूल, हल्दी पोखर सिंहभूम (बिहार) जो वर्तमान में झारखंड में स्थित है, वहाँ हिंदी विषय में अध्यापक के पद पर कार्य करना शुरू किया। साथ ही साथ रांची विश्वविद्यालय से एम.ए. करके विश्वविद्यालय के ही विभागाध्यक्ष डॉ. जय नारायण मंडल के निर्देशन में "जयशंकर प्रसाद और द्विजेंद्र लाल राय के नाटकों का तुलनात्मक अध्ययन" विषय पर पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की।
छोटी उम्र से ही साहित्य में रुचि होने के कारण 'विकल' उपनाम से साहित्य सेवा करने लगे। उन्होंने हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, बांग्ला, उड़िया और भोजपुरी में अपने साहित्य सेवा को आगे बढ़ाया। जिंदगी में तमाम परेशानी, उतार-चढ़ाव के बाद भी दिन-रात साहित्य सेवा में लगे हुए विकल जी कविता, कहानी, नाटक, आलोचना जैसे अनेक विधाओं में रचना करते रहे। अपने कुछ नाटकों का मंचन भी उन्होंने गिरि भारती स्कूल के 'सुंदरम' रंगमंच से सफलतापूर्वक कराया। गिरि भारती में नौकरी करते हुए विकल जी ने 'छोटा नागपुर कॉलेज हल्दी पोखर' नाम से एक सांध्यकालीन महाविद्यालय की स्थापना की। जो आज भी हल्दी पोखर वासियों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।
विकल जी के हिंदी रचनाओं में कर्मवीर, कमलाकांत, डूबे हुए भाई-बहन, जादूगर (नाटक), सर्वोदय सुमन, आशा किरण, फूल और कलियाँ (संपादित संस्कृत अनुवाद), मेरी साहित्य साधना के कई खंड अप्रकाशित रूप में है। श्रीमद्भागवत गीता का भोजपुरी में उन्होंने पद्य अनुवाद भी किया है जो प्रकाशित होकर लोगों के बीच उपलब्ध है। जिसकी भूमिका तत्कालीन शंकराचार्य ने लिखा था। वर्ष 2023 में इस पुस्तक का द्वितीय संस्करण का प्रकाशन डॉ. विकल जी के ज्येष्ठ पुत्र डॉ. आदित्य कुमार 'अंशु' जी ने कराया है। नवरतन देव, गाई गीत सुनाई गीत, मनपाखी, गीतांजलि (रवीन्द्र नाथ टैगोर की गीतांजलि का पद्य अनुवाद), उघटा पुरान, जीवन के पथ पाहुर (काव्य संग्रह) आदि कई प्रकाशित और अप्रकाशित रचनाएँ हैं। इसके अतिरिक्त जगन्नाथ प्रभु महिमा जो हिंदी में है जिसका बाद में उड़िया भाषा में अनुवाद प्रकाशित किया गया है।
आखर (भोजपुरी लोकगीत संग्रह) - 2025
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