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साँस चढ़ा कर, याद उठा कर, हिचकी देना ठीक नहीं

साँस चढ़ा कर, याद उठा कर, हिचकी देना ठीक नहीं

✍️ लेखन: सुधाकर

साँस चढ़ा कर, याद उठा कर, हिचकी देना ठीक नहीं

फोन उठा कर, कॉल लगा लो, बात बता दो जो भी है

 

प्यार अगर करती हो मुझसे अपने हक़ की बात करो

पर हो तीजा कोई अगर तो बात भुला दो जो भी है

 

मैं भी माफ़ी मांग रहा हूं, तुम भी छोड़ो बात अभी

दोनों हो जाएंगे रौशन,  बात जला दो जो भी है

 

 


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