कृपया प्रतीक्षा करें...
✍️ लेखन: पूर्णा
एक दिन सब शून्य होगा
सब मौन होंगे
शब्द अर्थहीन हो जाएँगे
इंसानियत दफ़न हो जाएगी
स्त्रियों से नहीं पूछी जाएगी उनकी हाँ, ना
बच्चों से छिन जाएगा बचपन
बुजुर्गों से कहानी सुनने कोई नहीं आएगा
दुनिया भयावह हो जाएगी
उजड़ते बसंत
सूखी नदियाँ
कंकड़-कंकड़ होते पहाड़
कहीं से प्रेम नहीं फूटेगा
इतने शून्य के बाद
इतने मौन के बाद
सभ्यताओं के उजड़ने के बाद
कविताएँ जीवंत करेंगी
और पेड़ों से जीवन बहेगा
इसलिए मेरा संदेश है कवियों के लिए
कि कविताएँ लिखते रहें
कविताएँ शून्य नहीं होती
और लोगों के लिए इतना कि
पेड़ लगाते रहे पेड़ शून्य नहीं होने देते ।
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