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पूर्णा

पूर्णा

युवा लेखिका, पढ़ाकू साथी अलीगढ़

परिचय

पूर्णा एक कवयित्री और लेखिका हैं, जिन्हें भावनाओं को शब्दों में पिरोना पसंद है। किशोरावस्था से ही लेखन उनकी अभिव्यक्ति का माध्यम रहा है। उनकी रचनाओं में प्रेम, प्रतीक्षा, स्मृतियाँ, रिश्ते और जीवन के छोटे-छोटे अनुभव सहजता से उभरकर आते हैं। उनका पहला कविता-संग्रह मैं फ़कीरा तथा दूसरा कविता-संग्रह इस...

कविताएँ

विस्तृत परिचय

पूर्णा एक कवयित्री और लेखिका हैं, जिन्हें भावनाओं को शब्दों में पिरोना पसंद है। किशोरावस्था से ही लेखन उनकी अभिव्यक्ति का माध्यम रहा है। उनकी रचनाओं में प्रेम, प्रतीक्षा, स्मृतियाँ, रिश्ते और जीवन के छोटे-छोटे अनुभव सहजता से उभरकर आते हैं।

उनका पहला कविता-संग्रह मैं फ़कीरा तथा दूसरा कविता-संग्रह इस बार ठहर जाना तुम पाठकों के बीच अपनी संवेदनशीलता और सरल भाषा के लिए पहचाने जाते हैं। वे मानती हैं कि शब्द केवल लिखे नहीं जाते, बल्कि जिए भी जाते हैं।

लेखन के साथ-साथ उन्हें चित्रकला का भी शौक है। अपनी रचनाओं और विचारों के माध्यम से वे प्रेम, सकारात्मकता और मानवीय संवेदनाओं को साझा करने का प्रयास करती हैं। उनकी कविताएँ पाठकों को अपने अनुभवों और भावनाओं से जुड़ने का अवसर देती हैं।

“शब्दों में प्रेम, प्रतीक्षा और जीवन की छोटी-छोटी अनुभूतियों को सहेजना ही मेरी लेखन-यात्रा का आधार है।”  - पूर्णा

रचनाएँ

दो किताबें प्रकाशित 

• मैं फ़कीरा 

• इस बार ठहर जाना तुम 

लेखक के बारे में:

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