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दीवार में एक खिड़की रहती थी (Deewar Me Ek Khidki Rhti Thi) - Vinod Kumar Shukla [विनोद कुमार शुक्ल] - Novel a Hindyugm

दीवार में एक खिड़की रहती थी (Deewar Me Ek Khidki Rhti Thi) - Vinod Kumar Shukla [विनोद कुमार शुक्ल] - Novel a Hindyugm

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Description:

दीवार में एक खिड़की रहती थी हिंदी साहित्य का एक अत्यंत संवेदनशील और प्रयोगधर्मी उपन्यास है। इस कृति में साधारण जीवन की छोटी-छोटी बातों, रिश्तों, सपनों और मनुष्य की भीतरी दुनिया को बेहद कलात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। उपन्यास का केंद्र एक सामान्य दांपत्य जीवन है, जहाँ प्रेम, अभाव, कल्पना और आत्मीयता मिलकर एक अलग संसार रचते हैं। “खिड़की” यहाँ केवल घर की दीवार में बनी जगह नहीं, बल्कि मनुष्य की आशा, स्वतंत्रता और कल्पना का प्रतीक बन जाती है। विनोद कुमार शुक्ल की भाषा काव्यात्मक, सरल और गहरी संवेदनाओं से भरी हुई है, जो पाठक को जीवन के सूक्ष्म सौंदर्य से परिचित कराती है। यह उपन्यास बताता है कि साधारण जीवन के भीतर भी असाधारण संवेदनाएँ छिपी होती हैं। हिंदी साहित्य में यह कृति अपनी मौलिक शैली, प्रतीकात्मकता और मानवीय भावबोध के कारण विशेष महत्व रखती है। भाषा पर तो विनोद कुमार शुक्ल का अपने ढंग का अधिकार है ही प्रेमचंद और जैनेंद्र के बाद इतनी सादा, रोज़मर्रा भाषा में शायद ही किसी और में अभिव्यक्ति की ऐसी क्षमता हो लेकिन इस उपन्यास में उन्होंने संभाषण की कई भाषाएँ और शैलियाँ ईजाद की हैं - एक वह जिसमें रघुवर प्रसाद लोगों से बोलते हैं, दूसरी वह जिसमें वे ख़ुद से बोलते हैं, तीसरी वह जिसमें रघुवर प्रसाद और सोनसी अपने एकांत में बोलते हैं और चौथी वह जिसमें रघुवर प्रसाद परिवार आपस में बात करता है जिसमें हल्की-सी आंचलिकता मिली हुई है, और पाँचवीं वह जिसमें विभागाध्यक्ष और पाचार्य बोलते हैं - सबसे ‘ठेठ’ वही है। एक और अद्भुत भाषा वह है जिसमें बोलने वाला और सुननेवाला बारी-बारी कहते कुछ हैं और सुनते कुछ और हैं और यह एक और ही अर्थबाहुल्य स्निग्धता को जन्म देता है। -विष्णु खरे

Product Information:
ISBN: 978-9392820786
Edition: First
Publisher: Hindyugm Prakashan
Binding: Paperback
Language: Hindi
Product Code: HP0001
Weight: 250 g
Dimensions: 22 x 14 x 1
Availability: In Stock
Quantity:

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Writer/Author विनोद कुमार शुक्ल
ISBN 978-9392820786
Edition First
Publisher Hindyugm Prakashan
Binding Type Paperback
Language Hindi
Weight 250 g
Dimensions 22 x 14 x 1
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Reviews (1)
LIPIKA
17-10-2026 18:15:32

दीवार में एक खिड़की रहती थी केवल प्रेम और पारिवारिक जीवन का उपन्यास नहीं, बल्कि जीवन को देखने की एक वैकल्पिक दृष्टि है। विनोद कुमार शुक्ल अपनी सहज भाषा और अनूठी कल्पनाशीलता के माध्यम से यह अनुभव कराते हैं कि कठोर से कठोर दीवार में भी एक खिड़की की संभावना बनी रह सकती है। यही संभावना इस उपन्यास को विशिष्ट और स्मरणीय बनाती है।

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