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'ड्रॉप ईयर' उन लाखों युवाओं की अनकही कहानी है जो अपने सपनों और समाज की अपेक्षाओं के बीच संघर्ष करते हुए बड़े होते हैं। नाबालिग उम्र में जब जीवन को समझने और स्वयं को पहचानने की शुरुआत होती है, उसी समय अनेक बच्चों को अपने घरों से दूर कोटा जैसे शहरों की कोचिंग संस्कृति में धकेल दिया जाता है। वहाँ उनका परिचय केवल एक विद्यार्थी के रूप में नहीं, बल्कि एक संभावित रैंक, एक संभावित डॉक्टर या इंजीनियर के रूप में कराया जाता है। बचपन से ही उन्हें सफलता के तयशुदा सूत्र सिखाए जाते हैं। फाउंडेशन, फंडामेंटल, इंटेंसिव प्रिपरेशन और अंतहीन परीक्षाएँ। उनके सामने एक ही सपना रखा जाता है कि यदि नीट या आईआईटी जैसी परीक्षाएँ पास कर लीं तो जीवन सफल हो जाएगा। लेकिन इस दौड़ में अक्सर कोई यह नहीं पूछता कि वे भीतर से क्या महसूस कर रहे हैं, उनके डर क्या हैं, उनकी इच्छाएँ क्या हैं और असफलता की स्थिति में उनका सहारा कौन बनेगा। 'ड्रॉप ईयर' केवल एक शैक्षणिक वर्ष की कहानी नहीं है, बल्कि उस मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक दबाव का दस्तावेज़ है जिसे आज का विद्यार्थी हर दिन जीता है। यह उपन्यास कोचिंग संस्थानों की प्रतिस्पर्धी दुनिया, परिवार की उम्मीदों और करियर की अंधी दौड़ के बीच पिसते उन युवाओं की आवाज़ बनकर सामने आता है जिनके संघर्ष अक्सर आँकड़ों और परिणामों के पीछे छिप जाते हैं। यह पुस्तक उन सभी विद्यार्थियों को समर्पित है जिन्होंने सपनों की कीमत चुकाई है, जिन्होंने सफलता और असफलता के बीच अपने अस्तित्व को बचाए रखने की लड़ाई लड़ी है और जो अपनी कहानियों के माध्यम से हमारे समय की सबसे महत्वपूर्ण सच्चाइयों को उजागर करते हैं।
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| Writer/Author | Sunsa Kerapa |
| ISBN | 978-8199908871 |
| Edition | First |
| Publisher | Khyaati Prakashan |
| Binding Type | Paperback |
| Language | Hindi |
| Weight | 200 g |
| Dimensions | 22 x 14 x 1 |
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