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Man Ki Kitab - (मन की किताब) Vinay Pratap Singh [विनय प्रताप सिंह] - Book a Poetry

Man Ki Kitab - (मन की किताब) Vinay Pratap Singh [विनय प्रताप सिंह] - Book a Poetry

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Description:

विनय प्रताप सिंह की पुस्तक "मन की किताब" मनुष्य के भीतर चलने वाले भावों, स्मृतियों, रिश्तों और आत्मसंवाद की एक संवेदनशील यात्रा है। यह पुस्तक पाठक को अपने ही मन के उन कोनों तक ले जाती है, जहाँ अक्सर शब्द नहीं पहुँच पाते। लेखक ने सरल लेकिन प्रभावशाली भाषा में जीवन के छोटे-छोटे अनुभवों को इस तरह प्रस्तुत किया है कि हर पाठक उसमें अपने जीवन की झलक देख सकता है।

Product Information:
ISBN: 9789364028929
Edition: First
Publisher: Manda Publisher
Binding: Paperback
Language: Hindi
Product Code: MP0002
Weight: 200 g
Dimensions: 22 x 14 x 1
Availability: In Stock
Quantity:

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Writer/Author विनय प्रताप सिंह
ISBN 9789364028929
Edition First
Publisher Manda Publisher
Binding Type Paperback
Language Hindi
Weight 200 g
Dimensions 22 x 14 x 1
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Reviews (6)
Anoop Kumar
24-05-2026 07:34:34

So incredibly proud of my talented friend for launching this gorgeous poetry book ! 📖✨ .The words in this collection are raw, beautiful, and deeply relatable. I found myself highlighting so many lines that spoke right to my soul. Do yourself a favor and grab a copy today—you won’t regret it!

Chakraverti Ayush Srivastava ‘the Zanib’
24-05-2026 19:00:43

Best book

Hemant Kumar Meghwal
25-05-2026 06:49:48

मैंने अभी तक इस पुस्तक को पढ़ा नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया (Instagram) पर इसकी कुछ झलकियाँ देखने के बाद मैं इसे पढ़ने के लिए काफी उत्साहित हूँ। जल्द ही इस पुस्तक को पढ़कर मैं पुनः इस मंच पर लौटूंगा और अपना एक सच्चा व निष्पक्ष (genuine) समीक्षा साझा करूंगा।

Rohit Nagar
27-05-2026 20:16:32

अच्छी पुस्तक है सबको पढ़नी चाहिए।🌷👀

Ajay Kumar Lal
30-05-2026 04:20:26

"मन की किताब" भावनाओं, संवेदनाओं और जीवन के अनुभवों का सुंदर काव्य-संग्रह है। विनय प्रताप सिंह की सरल एवं प्रभावशाली लेखनी पाठक के मन को छू लेती है। प्रत्येक कविता जीवन के किसी न किसी पहलू को सहजता से व्यक्त करती है, जिससे यह पुस्तक कविता-प्रेमियों के लिए एक सुखद और यादगार पाठन अनुभव बन जाती है।

Pratibha Gupta
08-06-2026 14:59:46

पुस्तक हाथ में आते ही सबसे पहले आपकी कविता "पापा का माँ के प्रति प्रेम" पढ़ी, जो अत्यंत हृदयस्पर्शी लगी। यह अपनी तरह की एक अनोखी कविता है। सच कहूँ तो शायद ही किसी लेखक के मन में यह विचार आए कि इस विषय पर भी इतनी संवेदनशील और सुंदर रचना लिखी जा सकती है। कविता पढ़ते हुए माता-पिता के रिश्ते की वह आत्मीयता और निस्वार्थ प्रेम सहज ही महसूस होने लगता है, जिसे हम अक्सर देखते तो हैं, पर शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते। आपकी लेखनी ने इस भाव को बहुत सुंदरता से अभिव्यक्त किया है। पुस्तक की शुरुआत ही इतनी प्रभावशाली रही कि अब शेष रचनाएँ पढ़ने की उत्सुकता और भी बढ़ गई है।

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