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मेरे घर में पृथ्वी (Mere Ghar Me Prithivi) - Vaishali Thapa [वैशाली थापा]

मेरे घर में पृथ्वी (Mere Ghar Me Prithivi) - Vaishali Thapa [वैशाली थापा]

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वैशाली थापा की कविताओं को पढ़ते हुए हम अपने भीतर के उस स्पेस को कभी भरता हुआ, कभी झरता हुआ अनुभव करते हैं। उनकी एक छोटी-सी कविता है, जो इस आशय को इंगित करती है : कौन-सी भाषा है जिसमें बारिश चुटकुले सुनाती है और पेड़ खिलखिला कर हँस देते हैं . यह उस स्पेस को खोजने और उसे एक नाम देने का प्रयास है, जो भाषिक अपूर्णताओं को पहचानती है और उसका अतिक्रमण करने का स्वप्न देखती है। शब्दों की भाषा से बारिश की भाषा तक यात्रा करती है। . 'जैसे कोई दरवाज़ा खटखटाए और भाग जाए...' दस्तक देकर भाग जाने के उस छोटे-से क्षण में जान लेने की तड़प और न जान पाने की कसक के बीच का जो स्पेस है, वैशाली थापा की कविताएँ उसी की आकांक्षा करती हैं। इसके लिए वह स्थिर दृश्य रचती हैं, ध्वनि और शब्द का कला-संयोग बनाती हैं, गहन मौन का आवाह्न करती हैं अथवा गति की आराधना करती हैं। उनकी कुछ कविताएँ ऐसा स्पेस रचती हैं, जिससे हम निस्तब्ध हो जाते हैं। कुछ ऐसी, जो हमारे चिन्तन की स्थूलता को पौष्टिक प्रश्न परोसती हैं। . इन कविताओं में 'ख़ुद को रचती, तपाती एक साधारण लड़की' है, जो जानती है कि 'अध्ययन की तमाम पोथियों पर एक दिन भारी पड़ गया एक अदना-सा अनुभव'। इस संसार में 'पहेली की तरह गुज़रते जीवन को कवि का सत्य सुलझाता है'। कविता के भीतर अनावृत्त पीठ देखकर आलिंगन कर लेने की कोमल इच्छा है, पेड़ उखाड़कर आसमान में टाँग देने और चेहरों की जगह चाँद रख देने की कल्पना है। . इन कविताओं को पढ़ते हुए यह देखना सुखद है कि 'दुःख भले ऊबकर निर्जन में जा बैठा है', लेकिन 'सच्चे दुःख का एक सेकण्ड जीवन के झूठे आश्चर्यों पर भारी पड़ जाता है' और 'संगीत सबके दुःख जानता है।' स्त्री, प्रेम, स्मृति, स्वप्न, यथार्थ, पेड़, चाँद, मंगल, पृथ्वी, जड़ें, कबूतर, किताबें, ऊँचाई से डर, एकांत, यात्रा, मृत्यु... और अंततः सत्य, अपने सत्य का संधान स्वयं करने की चुनौती वैशाली थापा की कविताओं का वितान बहुत बड़ा है और उनमें जीवन के प्रति अडिग निष्ठा है। यह उनका पहला कविता-संग्रह है। यह एक युवा कवि की दृष्टि से देखा गया संसार है, जिसमें आत्मिक स्वतंत्रता की चेतना है, उसके जागरण का मौन भार है और एक बोलती हुई उम्मीद है। – गीत चतुर्वेदी

Product Information:
ISBN: 9788197045424
Edition: First
Binding: Paperback
Language: Hindi
Product Code: HN0003
Weight: 200 g
Dimensions: 22 x 14 x 1
Availability: In Stock
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Writer/Author वैशाली थापा
ISBN 9788197045424
Edition First
Publisher Hindisthan Prakashan
Binding Type Paperback
Language Hindi
Weight 200 g
Dimensions 22 x 14 x 1
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