मैं पहली मुलाकात का सोचता हूं
कहूंगा मैं कुछ तो !
कहूंगा क्या क्या ?
सखी सोचता हूं
तो धड़कन बड़ी जाती हैं कुछ
मिलाऊंगा मैं हाथ तुमसे
नमी मैं बदन की
छुपाऊंगा कैसे
कि सूरजमुखी होंगी आंखें तुम्हारी
धनक सी
सँवर के
अगर आ गई तुम
मुझे प्रेम का ताप मारेगा तय है।