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पहली मुलाकात

✍️ लेखन: सुधाकर | श्रेणी: नज़्म

मैं पहली मुलाकात का सोचता हूं

कहूंगा मैं कुछ तो !

कहूंगा क्या क्या ?

सखी सोचता हूं

तो धड़कन बड़ी जाती हैं कुछ

मिलाऊंगा मैं हाथ तुमसे

नमी मैं बदन की

छुपाऊंगा कैसे

कि सूरजमुखी होंगी आंखें तुम्हारी

धनक सी

सँवर के

अगर आ गई तुम

मुझे प्रेम का ताप मारेगा तय है।

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