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मुझे जो भी मिला

✍️ लेखन: शिवम त्रिपाठी

 

मुझे दुनिया में जो भी मिला

सब कुछ भगवान पर चढ़ाता गया

हर बार मुझे दुःख मिला

किसी से नहीं कहा

सब कुछ भगवान को बताता गया

सुख मिला, दुःख मिला

दर्द मिला

सब कुछ भगवान को चढ़ाता गया

 

कभी हारा

कभी टूटा

तो कभी ग़मों से मारा गया

फिर भी अपना भक्त होने का कर्ज़ निभाता गया

मुझे जो भी मिला दुनिया से

सब कुछ भगवान को चढ़ाता गया

न मंज़िल मिली

न रास्ते मिले

मैं मंदिर गया

मुस्कुराता रहा

मैं रोया सदा

फिर भी भगवान से

सब कुछ छुपाता रहा

मुझे दुनिया से जो भी मिला

सब कुछ भगवान पर चढ़ाता गया ।

 

 

स्रोत : नवपल्लव के लिए शिवम त्रिपाठी द्वारा चयनित कविता। 


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