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Mauzu-e-Sukhan (मौज़ू-ए-सुख़न) - Anchit - Hindisthan Prakashan

Mauzu-e-Sukhan (मौज़ू-ए-सुख़न) - Anchit - Hindisthan Prakashan

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Description:

वह सज्दे में बैठा करती, हाथ उठे हुए, सर झुका हुआ, आँखें बंद। अपने लिए शायद ही कुछ माँगती और बाक़ी सबके लिए सब कुछ। उसने अपने आसपास की दीवारों से सवाल पूछे थे या नहीं पूछे थे, कोई नहीं जानता। पर वह वहाँ थी। एक नदी की तरह। कोई नहर नहीं। कोई ग्लेशियर नहीं। न खारा समंदर। नदी। सबकुछ साथ लेकर चलने वाली। किसी को नहीं छोड़ती। शहरों की ख़्वाहिशें पूरी करने को अपना काम मानती। उनको बसाती। उनसे बात करती। बारिश से पतझड़ तक। सर्दी से अगली गर्मियों तक। बिना माँगे। पर बिना झुके। शहरों को बिना नदी सोचा भी नहीं जा सकता। और इसलिए वह जीवन से भरी थी। और उसके आसपास सिर्फ़ जीवन था। जो जिया नहीं जाता, वह अंतरंग नहीं हो पाता। और फिर महसूस करना, किसी से ख़ुद को जोड़ना इतना सरल नहीं है, कई बार नैसर्गिक भी नहीं होता। मैं नदी होना चाहता हूँ, मेरे हिस्से दीयर आया है। - इसी पुस्तक से

Product Information:
Writer/Author: Anchit
ISBN: 978-81-970454-8-6
Edition: June 2026
Binding: Paperback
Language: Hindi
Product Code: HN0005
Weight: 200 g
Dimensions: 22 x 14 x 1
Availability: In Stock
Quantity:

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Writer/Author Anchit
ISBN 978-81-970454-8-6
Edition June 2026
Publisher Hindisthan Prakashan
Binding Type Paperback
Language Hindi
Weight 200 g
Dimensions 22 x 14 x 1
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