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तेरी आस में ही तो ज़िंदा हैं वरना

तेरी आस में ही तो ज़िंदा हैं वरना

✍️ लेखन: प्रशांत अरहत | श्रेणी: शेर

तेरी आस में ही तो ज़िंदा हैं वरना

ये आहिस्तगी से मेरी खुदकुशी है

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