तेरी आस में ही तो ज़िंदा हैं वरना
ये आहिस्तगी से मेरी खुदकुशी है
कृपया प्रतीक्षा करें...
✍️ लेखन: प्रशांत अरहत | श्रेणी: शेर
तेरी आस में ही तो ज़िंदा हैं वरना
ये आहिस्तगी से मेरी खुदकुशी है
इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
पढ़ेंहम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ भी चल पड़ेंगे, रास्ता हो जाएगा
पढ़ेंकिया वापस जो उनके फूल तो फिर यूँ हुआ है दोस्त कि मैंने ...
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