किया वापस जो उनके फूल तो फिर यूँ हुआ है दोस्त
कि मैंने खो दिया है एक अपना चाहने वाला
कृपया प्रतीक्षा करें...
✍️ लेखन: सुधाकर | श्रेणी: शेर
किया वापस जो उनके फूल तो फिर यूँ हुआ है दोस्त
कि मैंने खो दिया है एक अपना चाहने वाला
इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
पढ़ेंहम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ भी चल पड़ेंगे, रास्ता हो जाएगा
पढ़ेंतेरी आस में ही तो ज़िंदा हैं वरना ये आहिस्तगी से मेरी खुदकुशी है
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