इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी
लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
कृपया प्रतीक्षा करें...
✍️ लेखन: बशीर बद्र | श्रेणी: शेर
इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी
लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ भी चल पड़ेंगे, रास्ता हो जाएगा
पढ़ेंकिया वापस जो उनके फूल तो फिर यूँ हुआ है दोस्त कि मैंने ...
पढ़ेंतेरी आस में ही तो ज़िंदा हैं वरना ये आहिस्तगी से मेरी खुदकुशी है
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