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फूस का छप्पर

✍️ लेखन: निहाल सिंह

छोटा-सा फूस का छप्पर 

बनाया नदियाॅं के तट पर 

 

कच्ची माटी की दीवार 

उस पर बिछी घास की तार 

बबूल की लकड़ी के बने 

दो किवाड़ चौखट पर लगे 

कि टूट गए नीचे गिरकर 

छोटा-सा फूस का छप्पर 

 

संग ऑंधी बहा ले गई 

छत कुटी की उड़ा ले गई 

बच्चें उसके रोने लगे 

तिनका-तिनका चुगने लगे 

नग्न पाॅंव धूॅंप में चलकर 

छोटा-सा फूस का छप्पर 

 

काठ पानी में बह गए 

नन्हें मुख रोते रह गए 

कोई उनको चुप कराऍं 

और इक नया घर बनाऍं 

फिर उसी नदियाॅं के तट पर 

छोटा-सा फूस का छप्पर 

 

 

स्रोत : नवपल्लव के लिए निहाल सिंह द्वारा चयनित कविताओं में से एक कविता। 


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