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एक मज़दूर

✍️ लेखन: प्रशांत सागर

एक मज़दूर ने 

लोहा खोद कर निकाला

 

एक मजदूर ने 

उसे पिघलाया

 

एक मज़दूर ने साँचे में 

डाल लोहे को 

बंदूक की गोली बनाई

 

गोली पे पहला हक़ 

मजदूरों का था

 

हक़ मांगते 

एक मज़दूर ने 

वो गोली खाई।

 

 

स्त्रोत : गुप्त प्रेमपत्र । उपलब्धता : नवपल्लव बुक्स । कीमत : 249 


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