कृपया प्रतीक्षा करें...

YOUR CART
Total: ₹0
मेन्यू

मिस्टर अम्बेडकर !

✍️ लेखन: प्रशांत सागर

मिस्टर अम्बेडकर !

 

मिस्टर अम्बेडकर ! 

तुम्हारी किताब में 

ये काफ़ी खतरनाक विचार हैं कि पूरी आदम जात का एक आधार है

 

कि कोई किसी पर 

जुल्म न करे, 

जो जिससे मर्जी प्रेम करे

 

कि हक़ मिले हर 

हक़दार को 

खेत मिले 

हर हलदार को

 

जड़ और जंगल मिले 

वहाँ के वासी को 

रोटी मिले 

हर निवासी को

 

ऐसा कैसे होगा? 

जो कहीं नहीं हुआ 

वो कैसे होगा ?

 

मानव सभ्यता तो 

मालिकों की ही सभ्यता रही है

 

अम्बेडकर 

मजदूरों की कहानियाँ 

अब तलक तो मौन है

 

काफ़ी खतरनाक हैं मंसूबे तुम्हारे मिस्टर अम्बेडकर

 

बताओ 

तुम्हारे गुलाबी खयालों में 

पलता ये जादुई मुल्क कौन है?

 

 

स्त्रोत : गुप्त प्रेमपत्र । उपलब्धता : नवपल्लव बुक्स । कीमत : 249 


और कविताएँ

जुगाड़ वाला मुल्क़
पढ़ें
बच्चा बन जाने की छूट
पढ़ें
भूखी सभ्यताओं में ईश्वर
पढ़ें
घर का पता
पढ़ें
एक मज़दूर
पढ़ें

Start typing and press Enter to search