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हम दोनों

✍️ लेखन: मोहिनी रानी 'मधुमयी'

नदी के दोनों किनारों से हैं

हम दोनों

प्रेम का निश्छल बहाव

हमें जोड़े रखेगा हमेशा-हमेशा

जहाँ हम दोनों मिल गए

वहीं अस्तित्व ख़त्म हो जाएगा

प्रेम का

 

तो मैं चुनती हूँ

तुम्हारे समानांतर निरन्तर

चलते रहना ।

 

नवपल्लव बुक्स की वेबसाईट के लिए कवयित्री द्वारा चयनित कवितामधुमयी, पृष्ठ-113

 


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