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तुम्हारा आना

✍️ लेखन: मोहिनी रानी 'मधुमयी'

तुम्हारा आना मेरे जीवन में

रहा पूर्ण विराम सा

विराम मेरी कामनाओं पर

मेरे स्वप्नों पर.. मेरी श्वासों पर

मेरे जीवन पर

और मेरी स्थिति क्या रही

तुम्हारे जीवन में?

प्रश्नवाचक ही न?

कौन हूँ मैं तुम्हारी?

क्यों हूँ ...तुम्हारे जीवन में?

और जीती इन स्थितियों के मध्य

क्रमशः संसार के लिए हो रही

मैं विस्मयबोधक सी।

 

नवपल्लव बुक्स की वेबसाईट के लिए कवयित्री द्वारा चयनित कवितामधुमयी, पृष्ठ-123

 


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