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कुछ नाम

✍️ लेखन: मोहिनी रानी 'मधुमयी'

आश्चर्यजनक ! किन्तु सत्य

कि... पवित्र नदी के जल पर

उतराती राख पर पुनः

उभर उठे वही नाम जो

अनंत काल से छिपे थे

हृदय के गह्वर में...

 

कुछ नाम शरीर से परे

आत्मा पर लिखे होते हैं

तो कुछ रोम-रोम में

बसे हुए......जो...

नहीं मिटते... कभी नहीं..

देह के दूँठ होने के बाद भी नहीं,

श्वास टूटने के बाद भी नहीं

चिता की राख बनने के बाद भी नहीं..।

 

नवपल्लव बुक्स की वेबसाईट के लिए कवयित्री द्वारा चयनित कवितामधुमयी, पृष्ठ-105

 


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