कृपया प्रतीक्षा करें...
✍️ लेखन: मोहिनी रानी 'मधुमयी'
विवाहित महिलाएँ सभ्य हैं
क्योंकि उनके पास पति है
अविवाहित युवतियाँ सभ्य हैं
क्योंकि उनके पास समझदार पुरुष दोस्त हैं
कुलीन रहीं वे विधवायें
जो पति की मृत्यु का लांछन लिए
जीवनपर्यन्त चौखट थामे पड़ी रहीं
असभ्य हैं परित्यक्ता स्त्रियाँ
क्योंकि वे परित्यक्ता हैं
अकुलीन हैं तलाक़शुदा औरतें
क्योंकि वे मर्यादा न निबाह सकीं
स्त्रियों का अन्याय सहना
आत्महत्या कर लेना.. दोष नहीं है
अपितु..
एकाकी रहने की राह चुनना
उनका सबसे बड़ा दोष है
और ये दोष छा जाता है
उनके सौ-सौ गुणों पर ग्रहण सा
जिससे उन्हें मुक्ति मिलती है
मरने के बाद ही ।
नवपल्लव बुक्स की वेबसाईट के लिए कवयित्री द्वारा चयनित कविता, मधुमयी, पृष्ठ-98
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